Types & Functions Of Banks: बैंक के कार्य और प्रकार का विवरण जाने विस्तार से

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types and functions of banks

हेलो दोस्तों क्या आप बैंकिंग की तैयारी कर रही हैं या कंपटीशन में अपना समय दे रहे हैं। यदि आप इंटरनेट पर बैंक के प्रकार और बैंक के कार्य के बारे में जानना चाहते हैं तो यह पोस्ट आपके लिए बेहतरीन साबित हो सकती है। आप बैंकों की कार्य और प्रकार, बैंकों के प्रकार और उनके कार्य, बैंक कितने प्रकार के होते हैं इसके बारे में जानेंगे,

साथ में बैंक के कार्य क्या-क्या होते हैं? कौन कार्य बैंक करता है और किस प्रकार से Bank अपना कार्य पूरा करते हैं, तमाम प्रकार की जानकारी आप इस आर्टिकल के माध्यम से “टॉप जॉब ज्ञान” के अंतर्गत जानेंगे। तो चलिए स्टार्ट करते हैं।

बैंकों के प्रकार (Types of Banks)

मुख्य रूप से कुछ महत्त्वपूर्ण बैंकों के प्रकार के बारे में जानकारी प्रदान कर रहे हैं। बैंकों के प्रकार (Types of Banks) बैंकों को उनके कार्यों एवं प्रकृति के आधार पर निम्नांकित वर्गों में विभक्त किया

types and functions of banks

(1) व्यापारिक बैंक (Commercial Banks)
(2) औद्योगिक बैंक (Industrial Banks)
(3) कृषि बैंक (Agricultural Banks)
(4) विनिमय बैंक (Exchange Banks)
(5) बचत बैंक (Saving Banks)
(6) देशी बैंकर्स (Indigenous Bankers)
(7) केन्द्रीय बैंक (Central Banks)
(8) विनियोग बैंक (Investment Banks)
(9) सहकारी बैंक (Co-operative Banks)
(10) विकास बैंक (Development Banks)
(11) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (Regional Rural Banks)
(12) अन्तर्राष्ट्रीय बैंक (International Banks)

बैंकों के कार्य (Funcitons of Banks)

अब हम बैंकों की कार्यों (बैंक के कार्य) के बारे में जानेंगे। कुछ उनकी अंतर्गत भी कार्य होते हैं इसके अलावा अन्य विविध कार्य बैंकों के होते हैं, जिनको आप पूर्ण करके निष्कर्ष के साथ बैंकों के कार्य (Funcitons of Banks) जानेंगे।

1-निक्षेप स्वीकार करना
(1) स्थायी जमा खाता
(2) बचत खाता
(3) चालू खाता
(4) आवर्ती जमा खाता

2-ऋण प्रदान करना
(1) नकद साख
(2) अधिविकर्ष
(3) अग्रिम

3-एजेन्सी सम्बन्धी कार्य
(1) संग्रहण
(2) भुगतान
(3) धन हस्तान्तरण
(4) अभिगोपन
(5) प्रतिभूतियों का क्रय विक्रय
(6) संदर्भ देना

4-आन्तरिक तथा विदेशी व्यापार का वित्त प्रबन्ध
5-साख का सृजन
6-अन्य विविध कार्य
(1) सम्पत्ति की सुरक्षा
(2) विदेशी विनिमय
(3) यात्री चैक
(4) उपभोक्ता ऋण
(5) साख पत्र तथा ए.टी.एम. सुविधा
(6) समंक संकलन व प्रकाशन

बैंकों के कार्य (बैंक के कार्य) का विवरण

बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 5 (ख) में बैंकिंग शब्द की परिभाषा में बैंक के प्रमुख कार्यों को सम्मिलित किया गया है और धारा 6 में प्रमुख कार्यों के अतिरिक्त अन्य कार्यों को वर्णित किया गया है जिन्हें एक बैंकर कर सकता है। इस प्रकार एक आधुनिक बैंक के कार्य निम्नलिखित हैं, जिन्हें वह करता है या कर सकता है।

1-निक्षेपों या जमाओं को स्वीकार करना (Accepting of Deposits) –

जनता से जमा या निक्षेप स्वीकार करना बैंक का सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य है। आजकल वाणिज्यिक बैंक जनता की बचतों को जमा के रूप में लेता है और यह जमा एक प्रकार से जनता का बैंक के ऊपर ऋण है क्योंकि बैंक इस पर ब्याज देने और इसे वापस देने का दायित्व अपने ऊपर लेता है। बैंक निम्नलिखित खातों से रकम जमा करने की सुविधा देते हैं

(a) चालू खाता (Current Account) :

चालू खाता वह खाता होता है जिसमें जमाकर्ता अपनी रकम जमा कर सकता है और निकाल सकता है। यह खाता व्यवसायियों व उद्योगपतियों के लिये लाभदायक होता है। इस खाते में जमा रकम पर बैंक ब्याज नहीं देता है या बहुत कम देता है। इसमें खातादारों को चैक द्वारा प्रदान की गई सेवाओं के बदले में कुछ सेवा व्यय भी अदा करना पड़ता है। इस खाते को खोलने वाले को बैंक चैक बुक, जमा पर्ची बुक या आहरण पर्ची बुक व पास बुक निशुल्क देता है।

(b) सावधि जमा खाता (Fixed Deposit Account) :

इस खाते में जमा राशि एक निश्चित अवधि के-के लिये स्वीकार की जाती है। यह अवधि 3 माह या अधिक से अधिक 20 वर्ष हो सकती है। इस खाते में रकम जमा करने के बाद बैंक जमाकर्ताओं को एक जमा रसीद देता है जिसे सावधि जमा रसीद (Fixed Deposit Receipt or F.D.R.) या आवधिक जमा रसीद (Term Deposit Receipt or T.D.R.) कहते हैं। अवधि बीत जाने पर बैंक जमाकर्ता को जमा राशि ब्याज सहित लौटा देता है। इस प्रकार के खातों पर ब्याज की दर ऊँची होती है जो अवधि की सीमा के अनुसार निश्चित की जाती है। ।

(c) बचत बैंक खाता (Saving Bank Account) :

इस खाते में जमाकर्ता सप्ताह में जितनी बार चाहे रुपया जमा कर सकता है परंतु वह जमा रकम को सप्ताह में एक बार ही निकाल सकता है। यह खाता उन लोगों के लिये उपयोगी है जो अपनी बचत की छोटी-छोटी मात्रा में जमा करना चाहते हैं। आजकल अधिकांश कर्मचारी व छोटे व्यापारी इस खाते को रखने लगे हैं। विद्यार्थीगण भी, विशेष रूप से जिन्हें छात्रवृत्तियाँ मिलती हैं, इस प्रकार का खाता खोल सकते हैं। इस खाते के रखने वालों को बैंक पास बुक देता है। जो चैक की सुविधा चाहते हैं, उन्हें चैक बुक भी देता है। इसमें ब्याज की दर कम रहती है।

(d) गृह बचत बैंक खाता (Home Saving Bank Account) :

यह विधि अल्प बचत योजना के अंतर्गत सबसे अधिक लोकप्रिय है। इसमें बैंक द्वारा खातेदार को एक गुल्लक दी जाती है जिसमें जमाकर्ता तथा उसके घर के सदस्य छोटी-छोटी रकम डालते जाते हैं और एक निश्चित अवधि के बाद उस गुल्लक को बैंक में जाकर खोलते हैं या बैंक का एजेण्ट की जगह एक घर-घर जाकर गुल्लक खोलकर रकम जमा कर लेता है और गुल्लक से प्राप्त रकम जमाकर्ता के खाते में जमा कर दी जाती है।

छोटी बचतों को गतिशील बनाने का यह बहुत अच्छा तरीका है। इसमें ब्याज की दर बहुत कम होती है। आजकल कुछ बैंक गुल्लक पर्ची (slip) जमाकर्ता के पास रख देता है और बैंक का एजेण्ट प्रतिदिन जाकर खाताधारी से पैसे लेकर उस पर्ची में प्रविष्टि कर देता है और एक निश्चित समय के बाद उस राशि को ब्याज सहित खाताधारी को वापस कर दी जाती है।

2-ऋण एवं अग्रिम प्रदान करना (Granting Loans and Advances)

यह बैंकों का दूसरा महत्त्वपूर्ण कार्य है। जमा प्राप्त करना और ऋण देना वे दो स्तम्भ हैं जिन पर आजकल बैंकों का ढाँचा खड़ा रहता है। ऋण प्रायः उत्पादक कार्यों के लिये दिये जाते हैं तथा इन पर वसूल की जाने वाली ब्याज की दर अधिक होती है। ऋण देते समय बैंक को बहुत सतर्क रहना पड़ता है क्योंकि यदि बैंक ऋण सम्बंधी कोई गलती कर देते है तो वह बैंक के लिये हानिकारक सिद्ध हो सकती है। ऋण देने के निम्नलिखित तरीके हैं:

(a) साधारण ऋण और अग्रिम (General Loans and Advances) :

इसके अन्तर्गत बैंक किसी व्यक्ति को कोई निश्चित राशि किसी वस्तु की धरोहर पर या जमानत पर देता है। यह रकम ऋणी के चालू खाते में जमा कर दी जाती है और आवश्यकतानुसार ऋणी इसमें से रुपया निकाल सकता है। बैंक कभी भी इस प्रकार का ऋण वापस माँग सकता है।

(b) नकद साख (Cash Credit) :

इसमें बैंक अपने ग्राहकों को माल, स्टाक, कम्पनियों के अंश एवं अन्य स्वीकृत प्रतिभूतियों एवं बॉण्ड्स के आधार पर ऋण देते हैं। ऋण प्राय प्रतिभूतियों या माल की जमानत पर उसके मूल्य के 75% से अधिक नहीं दिया जाता है। यह मार्जिन इस कारण रखना पड़ता है क्योंकि जमा की गयी प्रतिभूतियों के मूल्य में थोड़ी कमी हो जाने से बैंकों को माल बेचने पर हानि न उठानी पड़े।

(c) बैंक ओवरड्राफ्ट या अधिविकर्ष (Bank Overdraft) :

बैंक अपने प्रतिष्ठित ग्राहकों को ओवरड्राफ्ट की सुविधाएँ देता है। यह एक प्रकार का ऋण है। यह सुविधा सामान्यतया चालू खाताधारकों को दी जाती है। ओवरड्राफ्ट की राशि बैंक निश्चित करता है। बैंक अपने ग्राहकों को चैक की सुविधा देता है और ग्राहक अपनी जमा रकम से अधिक राशि निकालने पर बैंक को ब्याज देता है।

(d) विनिमय विपत्रों को भुनाना (Discounting the Bills of Exchange) :

ग्राहकों द्वारा दिये गये बिलों, हुंडियों और वचन-पत्रों पर बट्टा या अपहार काटकर परिपक्वता अवधि से पूर्व रुपया उधार देने की पद्धति को बिलों का बट्टे पर भुनाना कहते है। ये ऋण अल्पकालीन और समुचित प्रतिभूतियों के आधार पर दिये जाते हैं। इन बिलों के बट्टे पर भुनाने से बिलों को धारकों तथा बैंक दोनों को लाभ होता है। बिलधारक परिपक्वता अवधि के पूर्व रकम प्राप्त कर अपना कार्य कर लेता है और बैंक परिपक्वता तिथि को स्वीकर्ता से रकम प्राप्त कर लेता है और बट्टे के रूप में लाभ कमा लेता है।

3-एजेण्ट के रूप बैंक के कार्य (Agency Functions) –

बैंक अपने ग्राहकों के लिए एजेण्ट के रूप में कई कार्य करता है जिनके लिये वह कमीशन प्राप्त करता है। एजेण्ट के रूप में बैंक निम्नलिखित कार्य करता है:

(a) रकम का अन्तरण-ग्राहकों के आदेशानुसार बैंक एक स्थान से दूसरे स्थान को रकम अन्तरित करने की व्यवसाय करता है। इसके लिए बैंक ग्राहकों से अन्तरण शुल्क होता है।
(b) चैक, बिलों, वचन-पत्रों आदि का संग्रहण-बैंक अपने ग्राहकों के खातों में जमा किये गये चैक, विनिमय-पत्रों एवं वचन-पत्रों की रकम संग्रह करके उनके खाते में जमा कर देता है और ग्राहकों से संग्रहण शुल्क वसूल करता है।
(c) अंशों तथा प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय-बैंक अपने ग्राहकों की ओर से अंशों, ऋण-पत्रों एवं प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय भी करता है।
(d) अभिगोपन कार्य-बैंक अपने ग्राहकों के अंशों व ऋण-पत्रों के निर्गमन पर उनके अभिगोपन का भी कार्य करते हैं।
(e) संदर्भ पत्र-बैंक अपने ग्राहकों को आर्थिक स्थिति के बारे में सन्दर्भ पत्र देशविदेश के व्यापारियों को भेजते हैं।
(f) ग्राहकों के अंशों पर लाभांश वसूल करना भी बैंकों का एक महत्त्वपूर्ण कार्य है।
(g) ग्राहकों की ओर से भुगतान करना-बैंक अपने ग्राहकों की ओर से उनके आदेशानुसार किराया, बीमा की किश्त एवं ऋण आदि का भुगतान करते हैं। >
(h) संरक्षक, प्रबन्धक आदि कार्य-बैंक अपने ग्राहकों के लिए संरक्षक, प्रबन्धक, सलाहकार एवं अटार्नी आदि का भी कार्य करते हैं।
(i) ग्राहकों की ओर से भुगतान संग्रह करना-बैंक अपने ग्राहकों की ओर से लाभांश, ब्याज, कमीशन आदि वसूल करते हैं और बदले में कमीशन लेते हैं।

4-विदेशी विनिमय का क्रय-विक्रय-

बैंक विदेशी मुद्राओं का क्रय-विक्रय करते हैं। सामान्यतः यह कार्य विदेशी बैंकों द्वारा किया जाता है परन्तु भारत में कुछ वाणिज्यिक बैंक इस कार्य को करते हैं। इनमें बिलों को भुनाना, तार द्वारा धन का अन्तरण, आयात-निर्यात के लिये जहाज का प्रबन्ध करना एवं माल को बन्दरगाहों पर सुरक्षित रखने की व्यवस्था करना आदि शामिल है।

5-नोट या पत्र-मुद्रा के निर्गमन का कार्य

19वीं शताब्दी में तो सभी बैंकों को नोट निर्गमन का अधिकार प्राप्त था किन्तु यह अधिकार अब प्रत्येक देश के केन्द्रीय बैंक को ही है। भारत में भारतीय रिजर्व बैंक, केन्द्रीय बैंक है और यही देश की मौद्रिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर नोटों का निर्गमन करता

6-आंतरिक तथा विदेशी मुद्रा का वित्त-पोषण-

बैंक विनिमय पत्रों को बट्टे पर भुनाने की सुविधा देकर आंतरिक एवं विदेशी व्यापार का वित्त-पोषण करता है। कभी-कभी बैंक विनिमय पत्रों एवं हुण्डियों की प्रत्याभूति पर अल्पावधि ऋण भी प्रदान करता है। विदेशी व्यापार के क्षेत्रों में बैंकों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है।

7-साख सृजन:

साख पत्रों का निर्गमन करना बैंकों का महत्त्वपूर्ण कार्य है। बैंक स्वयं चैक, बिल ड्राफ्ट, हुण्डी और ऋण-पत्रों के आधार पर साख-पत्रों का निर्गमन करता है।

8-बैंकिंग शिक्षा एवं प्रशिक्षण-

बैंक अपने कर्मचारियों को विभिन्न प्रकार का प्रशिक्षण समय-समय पर प्रदान करते हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद बैंकों के अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी पूर्ण क्षमता से कार्य करते हैं। वाणिज्यिक बैंक अपने प्रशिक्षण केन्द्रों पर इन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को समयसमय पर अल्प अवधि के लिये प्रशिक्षण पर भेजते रहते हैं।

अन्य कार्य (Other Functions)

(1) बहूमुल्य वस्तुओं की सुरक्षा-आजकल वाणिज्यिक बैंक अपने ग्राहकों को लॉकर्स सम्बंधी सुविधाएँ प्रदान करते हैं। इन लॉकर्स में बैंक अपने ग्राहकों के गहने, जेवरात, मूल्यवान वस्तुएँ, कागज, कम्पनी के अंशों एवं ऋण-पत्रों को रखते हैं। इस कार्य के लिये बैंक एक अलग विभाग “सेफ डिपाजिट वाल्ट” रखते हैं। बैंक इस कार्य के लिये ग्राहकों से सालाना विशेष कमीशन लेते हैं।
(2) यात्री चैक तथा साख की सुविधा-बैंक यात्रियों के लिये यात्री चैक अथवा गश्ती साख प्रमाण पत्र जारी करते हैं जिससे यात्रियों को यात्रा के समय नकद रुपया ले जाने के जोखिम से छुटकारा मिल जाता है।
(3) आर्थिक आँकड़ों का संग्रहण एवं प्रकाशित करना-बैंक, उद्योग, व्यापार एवं वाणिज्य सम्बन्धी आँकड़े और सूचनाएँ संकलित करते हैं और उन्हें प्रकाशित करते हैं।
(4) सरकार एवं अन्य संस्थाओं के ऋणों का अभिगोपन करना-बैंक भारत सरकार तथा अन्य संस्थाओं द्वारा निर्गमित ऋण-पत्रों का अभिगोपन सम्बन्धी कार्य करते हैं।

बैंक के कार्य

(5) व्यक्तिगत साख की सुविधा-बैंक विभिन्न व्यक्तियों को व्यक्तिगत साख की सुविधा प्रदान करते हैं और उन्हें अग्रिम एवं ऋण देते हैं।
(6) सलाह एवं सूचनाएँ देना-बैंक अपने ग्राहकों को अनेक सूचनाएँ एवं सलाह भी देता है।
(7) वित्तीय विषयों पर परामर्श देना-बैंक देश की आर्थिक स्थिति से परिचित रहते हैं इसीलिये वह अपने ग्राहकों को उनके वित्तीय मामलों में परामर्श देते हैं।
(8) अपने दावों के बदले अधिग्रहीत किसी सम्पत्ति का प्रबन्ध करना, बेचना या उससे रकम वसूल करना। बैंकों का योगदान। 139
(9) ऐसा कोई व्यवसाय करना जो केन्द्रीय सरकार अपने सरकारी गजट में प्रकाशित करे और जो बैंकिंग कम्पनी के लिये कानूनी रूप से आपत्तिजनक न हो।

(10) कम्पनी के वर्तमान या भूतपूर्व कर्मचारियों के लाभ के लिये संस्थाएँ, ट्रस्ट एवं संघ स्थापित करना।
(11) कम्पनी के विकास से सम्बन्धित सभी कार्य करना जिससे कम्पनी के व्यापार में वृद्धि हो सके।
(12) अन्य महत्त्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान करना।
(13) प्रत्येक प्रकार की प्रत्याभूति देने तथा क्षतिपूर्ति के वचन देने का व्यवसाय करना।
(14) निष्पादक, ट्रस्टी या अन्य किसी रूप से सम्पत्ति के प्रशासन का उत्तरदायित्व लेना।
(15) बैंकिंग कम्पनी के आनुषंगिक या विकास में सहायक सभी अन्य कार्यों को करना।

अन्य बैंक के कार्य

(16) पट्टेदारी की वित्तीय व्यवस्था (Financing for Leasing) ।
(17) उपभोक्ता साख प्रदान करना (Consumer Credit)
(18) सहयोग विधि योजना (Mutual Funds Scheme)
(19) साख पत्रकों का निर्गमन करना।
(20) उपहार चैक जारी करना।
(21) सुरक्षा संदूक (lock box) सेवा प्रदान करना।
(22) रात्रि सुरक्षा सेवा प्रदान करना।
(23) आपातकालीन प्रमाणक निर्गमित कराना।

(24) व्यक्तिगत कर सहायता प्रदान करना, आयकर, सम्पत्ति कर तथा विक्रय कर के रिटर्न (विवरणी) तैयार करना।
(25) समाशोधन गृह का कार्य करना।
(26) यूनिट ट्रस्ट के यूनिटों तथा राष्ट्रीय बचत प्रमाण-पत्रों की बिक्री करना।
(27) ग्राहक सेवा प्रदान करना।
(28) विस्तार पटल (extension counters) स्थापित करना।
(29) नवोन्मेषी (innovative banking) बैंकिंग अपनाना।

(30) बहुसेवा एजेन्सी शाखाओं की स्थापना।
(31) ग्राहकों के यात्रा एजेन्सी के कार्य करना।
(32) अपने ग्राहकों को व्यापारिक उच्चावचनों से अवगत कराना।
(33) व्यापारी बैंकिंग सेवाएँ (merchant banking services) प्रदान करना।

Bank Ka Agency Karya Kya hai?

दोस्तों हम बैंक एजेंसी कार्य (Bank Ka Agency Karya) के बारे में आपको बताने वाले हैं कि, कौन सा ऐसा कार्य बैंक एजेंसी करती है? जैसे कि आप जानते हैं बैंक Agency एजेंट का काम होता है. बैंक की सेवाओं (Serves) को उन ग्राहकों तक पहुंचाना जो बैंक शाखा तक नहीं जा सकते हैं.

इसके अलावा Agency Bank के उन कार्य को भी संभालती है जो बैंक शाखा से किए जाते हैं. जैसे खाता खोलना, बैंक स्टेटमेंट जारी करना, जमा करना, पैसा निकासी करना, आदि तमाम प्रकार के कुछ बैंक के ऐसे काम होते हैं जो Bank Agency संभालती है. उसके बदले में बैंक की ओर से धनराशि के रूप में कमीशन प्राप्त होता है तो इस प्रकार Bank Ka Agency Karya hai.

निष्कर्ष

ऊपर दिए गए कंटेंट में आपने बैंकों के प्रकार और बैंकों के कार्यों (Types & Functions Of Banks) के बारे में पढ़ा। आशा है आपको यह जानकारी बहुत ही उपयोगी लगी होगी। यदि आप कंपटीशन की तैयारी कर रहे हैं, तो यह जानकारी आपके बैंकिंग से रिलेटेड आपको सार्थक हो सकती है। आपकी कामयाबी ही हमारा उद्देश्य।

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